![]() | No ratings.
This poem has a conversation between a person and his sister who is about to get married. |
| नई सुबह एक नई सुबह कुछ कह रही बैठकर खुशियों की नौका में पतबार हिम्मत की थामकर जिन्दगी की नदिया को साथ तू पार कर दामन तू उनका थामकर एक नई उमंग कुछ कह रही नए रिश्तों के धागों से सुझ-बूझ और जज्बातों से प्यारे इन रिश्तों की डोर में खुद को तू बांधकर दामन तू उनका थामकर एक नई शाम कुछ कह रही मन की उन स्मृतियों मे बीते कल की यादों में रखना अपनी बातों में हमको सुधियाँ तू सजाकर दामन तू उनका थामकर एक नई जिन्दगी कुछ कह रही आते हैं पड़ाव कई जिन्दगी में रखना तू हिम्मत हर घडी में संभलना और सम्भालना उनको खुद को तू ढालकर दामन तू उनका थामकर एक नई सुबह कुछ कह रही....... |