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by shiv
Rated: E · Poetry · Career · #2218872
Don't give up easily
क्षितिज


देखे हैं सपने आसमान से
पर्वत पर चढ़ जाना है
कठिन परिश्रम से हमको
कुछ करके दिखलाना है

गिर जाएँ जब कदम-कदम पर
दृढ़ निश्च्य कर उठ जाना है
चाहें कितनी कठिन हो राहें
उज्वल भविष्य बनाना है

दिखे न कुछ मंजिल के सिवा
आखों में उसको बसना है
कर सदुपयोग आज समय का
अब आगे बढ़ते जाना है

फीकी पड़ जाए सूरज की तपिश
इतना खुद को तपना है
चमक भी सोने से ज्यादा
क्षितिज को छू जाना है ।।
© Copyright 2020 shiv (shivom at Writing.Com). All rights reserved.
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