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school days |
| डाँटो न हमें मेडम डाँटो न हमें मेडम बचपन का जामाना है ये दिन हैं खेल कूद के हँस-हँस के बिताना हे कभी आप भी बच्ची थीं स्कूल से भागी थीं कहते हैं शरारत मे आप तो हमसे भी आगे थीं गलतियाँ गर हम न करें तो ठोकर कोन खाएगा? गिर कर संभलने का पाठ कोन पाएगा? सोये हैं अभी तक अब खुद को जगाना है डाँटो न हमें मेडम बचपन का जामाना है...... जब भी कुछ पूछती हो कुछ बोल नही पाता हूँ कुछ बोलना भी चाहूँ तो सब भूल जाता हूँ केसा ये डर? इस डर को मिटाना है डाँटो न हमें मेडम बचपन का जामाना है...... कोमल गुलाबों की पंखुडी सा तन है चंचल है, नटखट पर भोला सा मन है कस के पकडो तो मुझॊ जाता है प्यार से लो तो खिल जाता है जलज बन कीचड मे खिल जाना है डाँटो न हमें मेडम बचपन का जामाना है...... बचपन के दिन जब भी पचपन मे याद आएँगे वो डाँट भरी क्लासें हम केसे भूल पाएगें हम आप के ही बच्चे हैं आप के पथ पर जाना हे डाँटो न हमें मेडम बचपन का जामाना है....... |