स्टूडेंट बेचारा एडमिशन की भाग दौड़ में जैसे-तैसे जाता कालेज में बापू की आशा के पथ पर चल पडा है स्टूडेंट डटकर स्टूडेंट बेचारा मंहगाई का मारा काँलेज और खर्चों से हरा जब सोचे वो घर स्व्देश था लगे पराया ये शहर देश सा किसका है विश्वास यहाँ पर चले हर कदम फूँक-फूँक कर किस मति ने उसको यहाँ पर डाला? स्टूडेंट बेचारा किस्मत का मारा काँलेज टीचर दुश्मन हैं इनके देते रोज "Assignments" गिन-गिन के रात-रात भर छपाई करना सुबह भरी धूप में उठना काँलेज जब वो Late पहुँचता प्यार भरा "May I come in sir" कहता सर पहले भर-भर के डाँटें साथ मे कडवी बातों के चाँटे इस सब पर वो मौन है रहता और मन ही मन भर आता फोन पर माँ से बातें करता पर दुखड़ा कभी बयाँ न करता अपनी माँ की आँख का तारा स्टूडेंट बेचारा हालात का मारा.... |