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by shiv
Rated: E · Poetry · Friendship · #2218869
About office and our colleagues
ऑफिस की बातें


फिर एक रात बीत गई
फिर नया दिन मुकर जाएगा
क्षणभंगुर सा ये जीवन हमारा
लगता ऑफिस में ही गुजर जाएगा

काम-काम और meetings में
Birthday और last-day greetings में
फ़ोन की घंटी and call transfer
ऑफिस के rules & regulations जानकार

अब तो माथा सटक गया है
ऑफिस से मन भटक गया है
कैसे समझूँ और समझाऊं
या इनको जीवन का सार बतलाऊँ

खैर छोडो ये दर्शनशास्त्र की बातें
चलो सुनें कुछ ऑफिस की बातें

दिन प्रतिदिन बढ़ी है जिम्मेदारी
फिर भी workshop की है तैयारी
Hard-work और team efforts में
सबसे आगे सोनल हमारी

काम यहाँ सब मन से करते हैं
कुछ नेहा के डर से डरते हैं
शिवानी का तो जवाब नहीं
Fashion के आगे duty का सवाल ही नहीं

बंकर बेचारे LIGO बंकर में पड़े हैं
दृढ़ निश्चय कर अकेले ही खड़े हैं
पर जब भी वो ऑफिस हैं आते
Headphone लगा कर पता नहीं कहाँ खो जाते

किस-किस की मैं गाथा गाऊं
इतने शब्द कहाँ से लाऊँ
अगले लेखन में बांकी सब बतलाऊगा
जब फिर से ऑफिस मैं ध्यान मगन हो जाउगा

पर…
खुद की कुछ कहना चाहता हूँ
चार पंक्ति और पढ़ना चाहता हूँ

कि…
क्या-क्या सोचा था बचपन में
बनूँगा Astronaut इस जीवन मैं
रास्ते-मंजिल सब पृथक हो रहे हैं
जीवन के घंटे तेजी से कम हो रहे हैं ।।
© Copyright 2020 shiv (shivom at Writing.Com). All rights reserved.
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