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Stars and Exoplanets |
तारे इतने सारे! तारे इतने सारे! आसमान को लगते प्यारे आकाशगंगा तुमसे जग-मग है ओ! मेरे बचपन के सहारे | बचपन में किस्से सुनता था प्रश्नों का मेला लगता था माँ की लोरी जब न भाती तुम्हें देख-देख सोता था | दिखते जो पर नहीं हो वैसे आपस में होली खेले हो जैसे दूर से लगता अकेले हो तुम अशंख्य ग्रहों से घिरे हो तुम | तुम्हारी ऊर्जा का तो जवाब नहीं तुम बिन जीवन का प्रसार नही तुमसे ही ब्रह्माण्ड बसे हैं हम सब तो तुमसे ही बने हैं | इस धरती पर ही जीवन सारा है? ऐसा नहीं कि ब्रह्माण्ड सिर्फ हमारा है बचपन से ये मान रहा हूँ अकेले नहीं हम, अब जान रहा हूँ | तुम तो खुद मे ही सागर हो ब्रह्माण्ड के सागर में गागर हो हम उस गागर में एक कड़ हैं पर हमें विज्ञान का अनुसरण है | बस विज्ञान से कदम मिलाना है कई रहस्यों से पर्दा उठाना है कहीं और जीवन है? खोज रहा हूँ इस जीवन को सफल बनाना है ॥ |